मैं तो वैरागी हूं,ना सम्मान ना मोह,ना अपमान ना भय,ना शत्रु, ना कोई मित्र,ना कोई अपना ना परायाना ईश संसार से कोई लेना ना देनापर कभी धर्म के नाम पे किये जाने वालाआडम्बर पक्षपात का आधार बनेगा तोमें उसका विनाश अवश्य ही करूँगा..
चढ़ गये जो हंसकर सूली,
खाई जिन्होंने सीने पर गोली,
हम उनको प्रणाम करते हैं,
जो मिट गए देश के लिए,
हम उनको सलाम करते हैं.
शुभचिंतक वो नही होते जो आपसे रोज़ मिलें और बातें करें...
शुभचिंतक वो है जो आपसे रोज़ ना भी मिल सकें
फिर भी आपकी ख़ुशी के लिए प्रार्थना करें...
सुप्रभात
मुस्कुराना एक कला है
जिसने इस कला को सीख लिया
वो जीवन में कभी दुखी हो ही नहीं सकता
अपने रिश्तों और पैसों की कद्र एक समान करें,
दोनों को कमाना मुश्किल है, लेकिन गवाना बहुत आसान।