वह खुली किताब थीऔर मैं अनपढ़..
राम भी उसका रावण उसकाजीवन उसका मरण भी उसका..तांडव है और ध्यान भी वो है,अज्ञानी का ज्ञान भी वो है..
हँस के पी जाओ भांग का प्याला..क्या डर है जब साथ है अपने त्रिशुल वाला..बम बम भोले
एक आस, एक एहसास, मेरी सोच और बस तुम,एक सवाल, एक मजाल, तुम्हारा ख़याल और बस तुम,एक बात, एक शाम, तुम्हारा साथ और बस तुम,एक दुआ, एक फ़रियाद, तुम्हारी याद और बस तुम,मेरा जूनून, मेरा सुकून बस तुम और बस तुम
ॐ नमः शिवायआप सभी को सावन की शुभकामनाए..
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। - हरिवंशराय बच्चन