तुम जाने दो सबको तारो के शहर में,तुम मेरे साथ केदारनाथ चलना।
नाम क्या दूँ मैं अपनी दीवानगी को..
बेचैनी दिल की तड़पने लगी है..
इस रवानगी से में क्या कहूँ..
जो हर पल तुम्हे याद करने लगी है.
Happy Hug Day.
चाँद तारो से रात जगमगाने लगी,
फूलों की खुश्बू से दुनिया महकने लगी,
सो जाइये रात हो गयी है काफ़ी,
निंदिया रानी भी आपको देखने है आने लगी
मैं नज़र से पी रहा हूँ ये समाँ बदल न जाए
न झुकाओ तुम निगाहें कहीं रात ढल न जाए
कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है
ज़िंदगी एक नज़्म लगती है