जहाँ कमरे में कैद हो जाती है ज़िन्दगी,लोग उसको बड़ा शहर कहते हैं ।
भीड़ में अकेला रह जाता हूँ,तेरी याद में ऐसे खो जाता हूँ l
फूलों की तरह महकते रहो,सितारों की तरह चमकते रहो,किस्मत से मिली है ये ज़िंदगी,खुद भी हंसो और औरों को भी हंसाते रहो..शुभ रात्रि।।
शुभ रात्रि।।
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलेंजिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
ये मेरी मोहब्बत थी की दीवानगी की इंतिहा, तेरे करीब से गुजर गया तेरे ही ख़यालो में!!
मेरी जिंदगी मै खुशियां तेरे बहाने से है, आधी तुझे सताने से है आधी तुझे मनाने से है.
मजबूती से बाहों में,
इस कदर थाम लूं तुझे…
की मेरे इश्क़ की कैद सेतू चाहकर भी ना छुड़ सकें…❤️