हमारी ही तमन्ना क्यों करो तुम,तुम्हारी ही तमन्ना क्यों करे हम lनहीं परवाह दुनिया को हमारी,दुनिया की परवाह क्यों करें हम l
हर रंग तुझ पर आकर निखर जाता है,तुमसे मिलना भी मेरा त्यौहार हो जाता है l
बहुत कुछ कहना था,पर कैसे और क्या,ये समझ नहीं आया,तो हाँथ पकड़,उसने कहा 'बस',मैने भी साँसे रोक,ज़रा जोर से दबा दिया l
जाने अब कौन आँखों से निकल,कागज़ पे आने वाला है,सुना हैं मेरा मेहबूब फिर,कोई तस्वीर बनाने वाला है l
वो गले से लिपट के सोते हैं
आज-कल गर्मियाँ हैं जाड़ों में
देखो रात फिर आ गयी
गुड नाईट कहने की बात फिर आ गयी
हम बैठे थे सितारों की पनाह में
चाँद को देखा तो आपकी याद आ गयी
Good Night Dear