नज़र में उसकी नज़र छोड़ आया,बंद ख़्वाबों को सहर तक छोड़ आया lपलक खुलती तो ना जाने क्या होता,जाने कहाँ मैं ये मन छोड़ आया l
ऐसे उसका ख़त कई बार पढ़ता हूँ,जैसे मैं इश्क़ की गली से गुजरता हूँ lहर बार रुकता हूँ उसी शब्द पे,जो बताता की, मैं उसके दिल में रहता हूँ l
मुझे नशे के लिए शराब नहीं चाहिए,बस तेरा आँखों में डूबना ही काफी है lअब दिन-रात बहका फिरता हूँ नशे में,मोह्हबत में यूँ डूबना ही काफी है l
जो रोज दिल को दे सुकून,वो प्यार है lमिले सोने को और मोहलत,तो रविवार है l
चलो मत छोड़ना ये डोर .
थामे रहना यूँ ही,
मैं इंतजार कर लूँगी……
एक जन्म तन्हा और सही….!!
तुम मुझे छोड़ के जाओगे तो मर जाऊँगा
यूँ करो जाने से पहले मुझे पागल कर दो