ऐसे उसका ख़त कई बार पढ़ता हूँ,जैसे मैं इश्क़ की गली से गुजरता हूँ lहर बार रुकता हूँ उसी शब्द पे,जो बताता की, मैं उसके दिल में रहता हूँ l
मेरे “शब्दों” को इतने ध्यान से ना पढ़ा करो दोस्तों,
कुछ याद रह गया तो.. मुझे भूल नहीं पाओगे!
नए साल की दिन के साथ,
आपकी जिंदगी भी खुशियों से भर जाए.
नया साल आपको और आपके समस्त
परिवार को बहुत मुबारक हो.
रात चुपचाप दबे पाँव चली जाती हैरात ख़ामोश है रोती नहीं हँसती भी नहींकांच का नीला सा गुम्बद है, उड़ा जाता हैख़ाली-ख़ाली कोई बजरा सा बहा जाता है चाँद की किरणों में वो रोज़ सा रेशम भी नहीं चाँद की चिकनी डली है कि घुली जाती हैऔर सन्नाटों की इक धूल सी उड़ी जाती है काश इक बार कभी नींद से उठकर तुम भी हिज्र की रातों में ये देखो तो क्या होता है
सितारे लटके हुए हैं तागों से आस्माँ परचमकती चिंगारियाँ-सी चकरा रहीं आँखों की पुतलियों मेंनज़र पे चिपके हुए हैं कुछ चिकने-चिकने से रोशनी के धब्बेजो पलकें मूँदूँ तो चुभने लगती हैं रोशनी की सफ़ेद किरचेंमुझे मेरे मखमली अँधेरों की गोद में डाल दो उठाकरचटकती आँखों पे घुप्प अँधेरों के फाए रख दोयह रोशनी का उबलता लावा न अन्धा कर दे ।