तेरे खामोश होंठों पर मोहब्बत गुनगुनाती है,तू मेरा है मैं तेरा हूँ बस यही आवाज़ आती है।
"सारा ज़माना, सप्ताह की परेशानी सी लगती है,तुमसे मिलना, रविवार वाली आसानी सी लगती है l"
"बैठे-बैठे एक मुस्कुराहट,ओंठो पे आ गई,कोई बात तुम्हारी प्यारी, जहन में आ गई,लोगो ने पूछा क्या है, क्यों हँस रहे हो,उन्हें क्या बताता, तुम कैसे पागल बना गई l"
"नाराजगीं की उम्र बस इतनी है जाना,इधर तुमने हाथ पकड़ा, उधर मैं माना l"
कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की