मेरी गलती बस यही थी के मैंने हर
किसी को खुद से ज़्यादा जरुरी समझा
नहीं ‘मालूम ‘हसरत है या तू मेरी मोहब्बत है,बस इतना जानता हूं कि मुझको तेरी जरूरत है।
एक रास्ता ये भी है मंजिलों को पाने का,
सीख लो तुम भी हुनर हाँ में हाँ मिलाने का।
वही शख्स आकेला छोड गया मुझे इस दुनिया कि भीड मेजिसने दुनिया की भीड़ से चुन के मुझे अपना बनाया था
मिलने का वादा कर गयी थी,
वापस लौट आउंगी ये कहकर गयी थी,
आई है अब वो जनाज़े पे मेरे,
वादा वो अपना निभाने चली थी!!