मैंने वहाँ भी तुझे माँगा था,
जहाँ लोग सिर्फ खुशियाँ माँगा करते हैं।
हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम,हर दर्द के निशान मिटाने लगे हैं हम,अब और कोई ज़ुल्म सताएगा क्या भला,ज़ुल्मों सितम को अब तो सताने लगे हैं हम।
मैं चंद्रमुखीतू सूरजमुखीमैं तुझसे दुखीतू मुझसे दुखीएक काम कर दे बिल्डिंग से कूदकर मरजा तू भी सुखी मैं भी सुखी |
अरे बेपनाह मोहब्बत की थी हमने तुझसे ओ बेवफा !
तुझे दुःख दूं ये न होगा कभी खुद मर जाऊं यहीं ठीक है !!
उसने पूछा सबसे ज्यादा क्या पसंद है तुम्हे
मैं बहुत देर तक देखता रहा उसे
बस ये सोचकर कि
खुद जवाब होकर उसने सवाल क्यूँ किया…!!