तूने फेसले ही फासले बढाने वाले किये थे
वरना कोई नहीं था, तुजसे ज्यादा करीब मेरे ||
ये दबदबा,ये हुकुमत,ये नशा, ये दौलतें………
सब किरायदार है, घर बदलते रहते हैं……
चलो आज खामोश प्यार को इक नाम दे दें,अपनी मुहब्बत को इक प्यारा अंज़ाम दे देंइससे पहले कहीं रूठ न जाएँ मौसम अपनेधड़कते हुए अरमानों एक सुरमई शाम दे दें !
Mat raho dur hum se Itna ki apne faisle par afsos ho jaye..
Kal ko kya pata aise ho mulaqat humari..
Ki Aap roye lipat kar humse, Aur hum khamosh ho jaye..
वो मुस्कुरा के मुकरने
की अदा जानता है
मैं भी आदत बदल
लेता तो सुकून में होता