दिल को छू जाती है यूँ रात की आवाज़ कभी
चौंक उठते हैं कहीं तूने पुकारा ही न हो
कागज पे मैंने अपने सब शौक हैं उतारे,ख़्वाबों को जी लिया, शब्दों के हैं सहारे lरंगीन दुनिया में, बे-रंग फिरते है मारे,तस्वीर में जो रंग थे, मैं पी गया वो सारे l
"सारे गुनाहों का हिसाब,क्या एक दिन में ले लेगा,ऐ खुदा अभी बक्श दे,कुछ काम जरुरी बाकी है l"
तेरे होने से बोलने लगी थी दीवारें भी,हँसी निकलने लगी थी हर कोने से भी lअब ये आलम है की,मैं भी चुप हूँ,और सब खामोश है l
क्या माँगू खुदा से तुझे,या तेरी परेशानियाँ माँगू lअब झुके सर सजदा को,रब से तेरी खुशियाँ माँगू l
सिसकियाँ ले रो रहा है शहर,
ना जाने खुदा को नींद कैसे आती है..🙏