ऐ हवा तू ये जुर्म ना करा कर,
तू उसे यूँ छूआ ना कर….
पूरी रात जाग वो मेरा बाहर इंतजार कर रही थी ,पगली ! मैं तेरे भीतर बैठा तेरा राह ताक रहा था l
“सच्चा प्यार” की यही पहचान है,
कितना भी “लड़ झगड़” ले,
एक दूसरे से “रूत जाए फिर भी,
एक दूसरे की “जान” होते है।
कल बुरा था,तो कल भी हो..जरुरी तो नहीं,दो रातों के बीच तो,हमेशा उजाला होता है l
देखो फिर से रात आ गयी गूड नाईट कहने की बात याद आ गयी
बैठे थे गुम सुम होकर चाँद को देखा तो तुम्हारी याद आ गयी ।
शुभ रात्रि
इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया
वर्ना हम भी आदमी थे काम के