देखो फिर से रात आ गयी गूड नाईट कहने की बात याद आ गयी
बैठे थे गुम सुम होकर चाँद को देखा तो तुम्हारी याद आ गयी ।
शुभ रात्रि
Sirf ek baar Galey Lag kar mere Dil ki Dhadkan Sunn,Phir Lautney ka irada Hum Tum par chor Den Ge.
बड़े प्यार से तराशा था उस संगेमरमर कोबड़ा नाज़ था उसे अपने आप पर.एक दरार क्या पड़ीकिसीने मुड़ कर देखना तक गंवारा न समझा.
Vo samjhta hai ki har shakhs badal jata hai…..
Ussey lagta hai zamana us ke jaisa hai….
इश्क का होना भी लाजमी है शायरी के लिये..कलम लिखती तो दफ्तर का बाबू भी ग़ालिब होता।