हमने ज़िन्दगी बितायीआँख सिरहाने लेकर,रात दुल्हन सी आयीसपने सुहाने लेकर…Shubh Ratri
हाल तेरा हर वक़्त पूछ नहीं पाता,ये ना समझना की याद नहीं आता lहर पहर कुछ नहीं बदलता,ये आदत है मेरी, इस पर बस मेरा नहीं चलता
ख़फ़ा हो, गुस्सा हो और नाराज़ भी होचलो ! कोई बात नहीं,गलती मेरी है मना लूँगा lचली भी गई ग़र जो मुझे छोड़कर,ये वादा है बेवफा का इल्ज़ाम ना दूँगा l
HAPPY NEW YEAR