क्या करोगे तुम मुझसे ऐसी मुलाकातजहा बिछड़ने का रिवाज न हो.
क्या करोगे तुम मुझसे ऐसी मुलाकात
जहा बिछड़ने का रिवाज न हो.
हूँ भीड़ में ,पर भीड़ का हिस्सा ना हो पाया lज़हन में थी तुम,कोई दूसरा किस्सा ना हो पाया l
खिलखिलाती सुबह है, है ताजगी भरा सवेराफूलों और बहारों ने, है रंग अपना बिखेराबस इंतज़ार है आपकी एक मुस्कराहट काजिसके बिना… ये दिन है अधूरा!Good Morning
"तुम में खो के मैं,खुद को पाता हूँ,यही एक सच है,मैं सब से छुपाता हूँ l"
"मेरी शब्दों में अगर,तुम्हारा महबूब दिख जायेतो मेरी कोई खता नहीं,मैंने तो सब अपने,दिल के नाम लिखा है l "