बड़ी दूर तक जाने का इरादा है,यही एक छोटा सा वादा है lमेरे गमो को चुम लेती है वो ,उसकी खुशी हो जाने का इरादा है l
उसकी पलकों से आँसू को चुरा रहे थे हम…
उसके गमों को हंसी से सजा रहे थे हम…
फिर जलाया उसी दीये ने मेरा हाथ…
जिसकी लौ को हवा से बचाये जा रहे थे हम…
कौन सी लत ये मुझे सोचने की लग गई हैफ़ैसले कितने हुआ करते थे आसान मेरे
“सब को शौक़ है दरारों में झांकने का,दरवाज़ा खोल दो तो कोई हाल तक नहीं पूछता”
मैं जब सो जाऊँ इन आँखों पे अपने होंट रख देना
यक़ीं आ जाएगा पलकों तले भी दिल धड़कता है