तुम्हें कैसे लगा मैं फ़ोन नम्बर भूल जाऊँगामुझे तो रोल नम्बर भी तुम्हारा याद है अब तक।
इत्तेफाक से तो नहीं,
हम दोनों टकराये
कुछ तो साजिश
खुदा की भी होगी
एहसान करो तो दुआओ में मेरी मौत मांगना
अब जी भर गया है जिंदगी से !
एक छोटे से सवाल पर
इतनी ख़ामोशी क्यों ….?
बस इतना ही तो पूछा था-
“कभी वफ़ा की किसी से…
जिंदगी का हर लम्हा कुछ सिखाता है
इस साल ने भी बहुत कुछ सिखाया है
नया सीखते रहिये कभी तो काम आएगा
आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें
आओ झुक के सलाम करें उनको,जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है,खुशनसीब होता है वो खून,जो देश के काम आता है.