नए सप्ताह में नए दिन की शुरुआत करते है ,मिलते है किसी मोड़ पर फिर नई बात करते है l
"किताबों के बीच आज भी,उसके ख़त छुपा रखे है,आज भी हर शब्द में, तेरी मौजूदगी नज़र आती है l"
सुना था बदल जाती है आदतें भी वक़्त के साथ,पर रूह तो जिस्म छोड़ती है बस मौत आने के बाद,
"ना जाने कब फिर शहर बंद हो जाये,
एक बार नज़र भर देखना चाहता हूँ,
कई दिनों से एक ख़त किताबों में है,
अब उसके हाथो में दे देना चाहता हूँ l"
ये मुझे चैन क्यों नहीं पड़ता ,
एक ही शख्स था क्या पुरे जहान में .....
मैं उसका हूँ, यह तो मैं जान गया हों लेकिन,
वह किस का है, ये सवाल मुझे सोने नहीं देता......
ग़म न कर ज़िन्दगी बहुत बड़ी है,
चाहत की महफ़िल तेरे लिए सजी है,
बस एक बार मुस्कुरा कर देख,
तक़दीर खुद तुझसे मिलने बाहर खुद खड़ी है…