" फर्क ये है कि मैं आँखों में काजल नहीं लगाता,शायद इसलिए मैं आँखों से झूठ नहीं बोल पाता l"
फिर उसी बेवफा पे मरते हैं,फिर वही ज़िन्दगी हमारी है ।
नज़र में उसकी नज़र छोड़ आया,बंद ख़्वाबों को सहर तक छोड़ आया lपलक खुलती तो ना जाने क्या होता,जाने कहाँ मैं ये मन छोड़ आया l
तुम्हें अपने आँगन के पेड़ की,याद नहीं आती..खिड़की पे जो मिलती थी नज़र,वो एहसास आँखों में नहीं आती l
आँखे तो प्यार में दिल की जुबान होती है,
चाहत तो सदा बेजुबान होती है,
प्यार में दर्द भी मिले तो क्या घबराना,
सुना है दर्द से चाहत और जवान होती है.