ऐ समंदर मैं तुझसे वाकिफ हूँ
मगर इतना बताता हूँ,
वो ऑंखें तुझसे गहरी हैं
जिनका मैं आशिक हूँ।
कुछ तुम को भी है अज़ीज़ अपने सभी उसूल,कुछ हम भी इत्तफाक से ज़िद के मरीज़ है
"अपने गलतियों पे झुक के माफ़ी माँग लेना,
अपने अहम से जादा रिश्तों को मोल देना,
वैसे तो हमें बार -बार लौट आने की आदत है,
पर मेरी मोह्हबत को कमजोरी ना जान लेना l"
“उसकी याद हमें बेचैन बना जाती हैं,
हर जगह हमें उसकी सूरत नज़र आती हैं,
कैसा हाल किया हैं मेरा आपके प्यार ने,
नींद भी आती हैं तो आँखे बुरा मान जाती हैं.”
दूर हो जाने की तलब है तो शौक से जा…
बस याद रहे की मुड़ कर देखने की आदत इधर भी नही…
जिनकी याद तुम्हें खुशी के लम्हों में आई
समझो कि तुम उन्हें प्यार करते हो
और जो गम में याद आए
जान लो वो तुम्हें प्यार करते हैं