तुम्हारा आगोश देता है सुकून-ए-इश्क़ मुझको,ज़िन्दगी भर अपनी बाहों में यूँही क़ैद रखना मुझे
तुम्हारा आगोश देता है सुकून-ए-इश्क़ मुझको,
ज़िन्दगी भर अपनी बाहों में यूँही क़ैद रखना मुझे
सभी तारीफ करते हैं मेरी शायरी की लेकिन
कभी कोई सुनता नहीं मेरे अल्फाज़ो की सिसकियाँ
" दो ही नशा है जो मैं करता नहीं,और बिन किये भी मैं रहता नहीं,एक चाय और एक तुम.. "
बातों ही बातों में कोई बात बुरी लग जाती है,इस लिए वो महीने में कई बार मुझसे लड़ जाती है lपूछता हूँ कि बात क्या है.. उसे भी याद नहीं,नाराज़ होती है फिर बात उसे कहाँ याद रह जाती है l
आ गया है फर्क तुम्हारी नजरों में यकीनन…
अब एक खास अंदाज़ से नजर अंदाज़ करते हो हमे…