काग़ज के फूल भी महकते हैं,
कोई देता है, जब मोहब्बत से!
छीन ले मुझसे मेरा सब कुछ,मेरे अंदर का जहां रहने देना,तेरे महलो की ख्वाहिश नहीं,अंधेरा टूटा मकान रहने देना l
ये दूरियाँ कब मोह्हबत,
कम कर पाती है,
यादें तो बेहिसाब,
तन्हाई में आती है l
या देवी सर्व भूतेषु माँ रूपेण संस्थिता ।
या देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता ।
या देवी सर्व भूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता ।
या देवी सर्व भूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै। नमस्तस्यै।
नमस्तस्यै। नमो नमः।।
ना छेड किस्सा-ए-उल्फत, बडी लम्बी कहानी है,
मैं ज़माने से नहीं हारा, किसी की बात मानी है,,,,,,।।
Ye mout bi badi ajeeb chiz hei yaro…
Sala Ek Din Marne ke liye Puri Zindgi Jini padTi hey…