"कतरा-कतरा रौशनी का,होके हम जल जायेंगे..हो अंधेरा कितना घना भी,भोर बनके आयेंगे.... "
वो नदी की मीठी पानी,उस जैसा कोई अनमोल नहीं,समंदर में बहुत है पानी,पर वो उसका कोई मोल नहीं l
ज़ुल्म इतना ना कर के लोग कहे तुझे दुश्मन मेरा…!!
हमने ज़माने को तुझे अपनी “ जान ” बता रक्खा है…!!
लगता है मेरा खुदा मेहरबान है मुझ पर …
मेरी दुनिया में तेरी मौजूदगी यूँ ही तो नहीं है …
जब से बाजी, वफा की हारे हैं.
दोस्तों, हम भी गम के मारे हैं.
तुम हमारे सिवा,सभी के हो,
हम किसी के नहीं,तुम्हारे हैं