मैंने कई बार की प्रार्थनापर ईश्वर सेमाँगा नहीं कभी कुछमुझे लगता हैवो जानता है...हमारे लिए क्या सही हैऔर क्या ग़लत..
"दोस्ती से प्यार तक एक 'रेखा' खींच दी,बातों ने उनकी ना जाने कब मोह्हबत रच दी,ख्वाहिशें ना जाने कितना 'अंकुर' हो गये,आग दिल में लगा, उसने मेरी दुनियाँ तज दी l"
चेहरे पर हंसी और आँखों में नमी सी है.
हर सांस कहती है आपकी कमी सी है..
किसने दस्तक दी ये दिल पर कौन है
आप तो अंदर है फिर बाहर कौन है..
तुम लौट कर आने की तकलीफ मत करना,
हम एक मोहब्बत दो बार नहीं करते !
उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा ???
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है !!!