मिली थी जिन्दगी किसी के “काम” आने के लिए,
पर वक्त बीत रहा है क़ागज के टुकड़े कमाने के लिए…
किसी को काँटों से चोट पहुंची
किसी को फूलों ने मार डाला
जो इस मुसीबत से बच गए थे
उन्हें उसूलों ने मार डाला
चाँद तारो से रात जगमगाने लगी,
फूलों की खुश्बू से दुनिया महकने लगी,
सो जाइये रात हो गयी है काफ़ी,
निंदिया रानी भी आपको देखने है आने लगी
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले
रिश्ता ऐसा हो जिस पर नाज़ हो,
कल जितना भरोसा था उतना ही आज हो,
रिश्ता सिर्फ वो नहीं जो ग़म या ख़ुशी में साथ दे,
रिश्ते तो वो हैं जो हर पल अपनेपन का एहसास दें!