एक आँसूं कोरे कागज़ पर गिरा,
वो अधूरा ख़त पूरा हो गया!
बे-ख़्वाबी कब छुप सकती है काजल से भी,
जागने वाली आँख में लाली रह जाती है!
कोई तुमसे सीखे.....मौजूद रहना मुझ में !!
फिर उसी बेवफा पे मरते हैं,फिर वही ज़िन्दगी हमारी है ।
मुझे नशे के लिए शराब नहीं चाहिए,बस तेरा आँखों में डूबना ही काफी है lअब दिन-रात बहका फिरता हूँ नशे में,मोह्हबत में यूँ डूबना ही काफी है l
चलो मत छोड़ना ये डोर .
थामे रहना यूँ ही,
मैं इंतजार कर लूँगी……
एक जन्म तन्हा और सही….!!