ख़ुदकुशी जुर्म भी है सब्र की तौहीन भी है,इस लिए इश्क में मर-मर के जिया करते हैं।
किस जुर्म में छीनी गई मुझसे मेरी हँसी?
मैने तो किसी का दिल दुखाया भी ना था
मेरा दिल तो जैसे है बच्चों का गुल्लक ,भरा जिसका जी वही तोड़ता है।
हिम्मत नहीं अब बहस करने की
जो तुम कहो वही ठीक है !
Pyar वो नहीं जो कोई कर रहा है
प्यार वो है जो कोई निभा रहा है!!