चलो एक कप चाय बनाते है,
तुम चीनी बन कर घुल जाना,
हम पत्ति बनकर रंग जमाते है।
हद ना पूछो मेरीबेबसी की तुम..मै दर्द बयां करता हूंऔर तू हंसकर सुनती है..!
हद ना पूछो मेरी
बेबसी की तुम..
मै दर्द बयां करता हूं
और तू हंसकर सुनती है..!
मेरे अनकहे "अलविदा" को…
तुम्हारे फिर से मिलने का इंतज़ार हैं ।
"हर नज्म में तुमको लिखा है,हर शब्द में तुमसे मिला है,ये दिल आवरगी में भी रहा हो,कलम उठा तुमसे ही मिला है l"
ये बदमाशी की बातें सोच समझ कर किया कर बेटे,
क्योंकि जिन किताबों से तूने सीखा है वो किताब मैंने ही लिखी है !