थकान भरी है जिंदगी
पर मुझे अब खुद से छुट्टी चाहिये
कोरा कागज था मन मेरा जिस
पर नाम है,था, सिर्फ और सिर्फ तेरा
" 'तुम ठीक हो' मेरे पूछने पे,जवाब 'हाँ' में आना ही..आज किसी मोह्हबत वाली,बात से जादा सुकून देता है l"
"मन अकेला और यादों वाला ज़माना होता है,ये नज़्म ही, तुमसे बातों का बहाना होता है l"
"कभी मेरे जाने पे लड़ती है वोकभी खुद तन्हा छोड़ जाती है,
"अपने गलतियों पे झुक के माफ़ी माँग लेना,
अपने अहम से जादा रिश्तों को मोल देना,
वैसे तो हमें बार -बार लौट आने की आदत है,
पर मेरी मोह्हबत को कमजोरी ना जान लेना l"