कभी किसी की बुराई मत करो
क्योंकि बुराई तुम में भी है
और जुबान दूसरों के पास भी ।
आज की रात भी तन्हा ही कटी
आज के दिन भी अंधेरा होगा
बस ये हुआ कि उस ने तकल्लुफ़ से बात की
और हम ने रोते रोते दुपट्टे भिगो लिए
आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक
अफवाह थी कि मेरी तबीयत खराब है
लोगो ने पूछ-पूछ कर बीमार कर दिया
इकरार बदलते रहते है… इंकार बदलते रहते हैं,
कुछ लोग यहाँ पर ऐसे है जो यार बदलते रहते हैं।