कभी किसी की बुराई मत करो
क्योंकि बुराई तुम में भी है
और जुबान दूसरों के पास भी ।
आज की रात भी तन्हा ही कटी
आज के दिन भी अंधेरा होगा
आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक
माँ की लोरियाँ अब कहाँ?
चिड़ियों की बोलियाँ अब कहाँ?
ख़ुद से ही जगाना हैं हमें अब तो,
ज़िंदगी आ गई हैं जिस जगह.
गुड मॉर्निंग शायरी.
अफवाह थी कि मेरी तबीयत खराब है
लोगो ने पूछ-पूछ कर बीमार कर दिया
इकरार बदलते रहते है… इंकार बदलते रहते हैं,
कुछ लोग यहाँ पर ऐसे है जो यार बदलते रहते हैं।