हमसे ना कट सकेगा अंधेरो का ये सफर
अब शाम हो रही हे मेरा हाथ थाम लो।
फेर लेते हैं नज़र, दिल से भुला देते हैं,
क्या यूँ ही लोग वाफ़ाओं का सिला देते हैं,
वादा किया था फिर भी ना आए मज़ार पर,
हमने तो जान दी थी इसी ऐतबार पर!!
लड़की – क्या कर रहे हो?
लड़का – मूंगफली खा रहा हूँ।
लड़की – Haww! अकेले अकेले,
लड़का – अब 10 रूपये की मूंगफली में भण्डारा करू क्या….!!
न मेरा एक होगा , न तेरा लाख होगा,
तारिफ तेरी ,न मेरा मजाक होगा,
गुरुर न कर शाह-ए-शरीर का,
मेरा भी खाक होगा , तेरा भी खाक होगा
कभी शोख हैं,
कभी गुम सी है..
ये बारिशे भी तुम सी है..
बिना पासवर्ड लगा हुआ Wi-Fi मिल जाना भी पिछले जन्म के किसी पुण्य का ही परिणाम होता है।