गम के अंधेरे में दिल को बेकरार कर,
सुबह जरूर होगी थोड़ा तो इंतजार कर॥
क्या करोगे तुम मुझसे ऐसी मुलाकातजहा बिछड़ने का रिवाज न हो.
क्या करोगे तुम मुझसे ऐसी मुलाकात
जहा बिछड़ने का रिवाज न हो.
कोई आदत, कोई बात, या सिर्फ मेरी खामोशी,कभी तो, कुछ तो, उसे भी याद आता होगा।
वो आज भी मेरे Password में रहती है
जिसे भूलने का दावा मैं रोज करता हूँ
एक तरफ तेरी बढ़ेगी नराजगी,और एक तरफ बेचैनी मेरी lएक बार लगेगा की फासला बढ़ रहा,और फिर लगेगा कितने करीब है रहा l
मेरे रोने का जिस में क़िस्सा हैउम्र का बेहतरीन हिस्सा है