"शिकायत करूं, तो नाराज़ हो जाती है,उम्मदगी में अपनी, मैं हार जाता हूँ,मोह्हबत है, और फ़िक्र भी ना आए,ऐसी जिल्लत वाली इश्क़ में मर जाता हूँ l"
कभी सीने से लगा कर
मेरे दिल की धड़कन तो सुनो,
ये हर पल सिर्फ तुम्हारा ही नाम लेती है!!
कुछ यूँ उतर गए हो मेरी रग-रग में तुम,कि खुद से पहले एहसास तुम्हारा होता है।
एक फूल अजीब था,
कभी हमारे भी बहुत करीब था,
जब हम चाहने लगे उसे,
तो पता चला वो किसी दूसरे का नसीब था ।
Yaad rahega ye dour- E hayaat humko
Ki tarse the zindgi me zindgi ke liye