"शिकायत करूं, तो नाराज़ हो जाती है,उम्मदगी में अपनी, मैं हार जाता हूँ,मोह्हबत है, और फ़िक्र भी ना आए,ऐसी जिल्लत वाली इश्क़ में मर जाता हूँ l"
मेरी ज़िन्दगी की ये सबसे बड़ी तमन्ना हैं, मेरे पास रहो तुम हमेशा मेरी साँस बनके।
वो बेवफा हर बात पे देता है परिंदों की मिसाल,
साफ साफ नहीं कहता मेरा शहर छोड़ दो।
दो मुलाकात क्या हुई हमारी तुम्हारी,निगरानी में सारा शहर लग गया।
जिंदगी एक सजासी हो गई है,
गम के सागर मे कुछ इस कदर खो गयी है,
तुम आजाओ वापिस ये गुजारिश है मेरी,
शायद मुझे तुम्हारी आदत सी हो गई है ।