दिल को छू जाती है यूँ रात की आवाज़ कभी
चौंक उठते हैं कहीं तूने पुकारा ही न हो
"जो आज है,वो कल नहीं होगा,तेरे-मेरे मिलने का सिलसिला नहीं होगा,ना तुम रुठोगी, ना मैं मनाऊंगा,ये रोज-जीने मरने का सिलसिला नहीं होगा l"
सिसकियाँ ले रो रहा है शहर,
ना जाने खुदा को नींद कैसे आती है..🙏
वो दिल ही क्या जो तुझसे मिलने की दुआ न करे,
ए सनम.......
में तुझको भूल कर जिन्दा रह सकूं ऐसा रब्ब न करे.
ऐसा नहीं था कि इस दिल में तेरी तस्वीर नहीं थी
लेकिन इन हाथों में तेरे नाम की लकीर ही नहीं थी
Main uske haathon ka khilona hi sahi;
kuch der ke liye hi sahi, usne mujhe chaha to hai..