दोस्त की ख़ामोशी को मैं समझ नहीं पाया,चेहरे पर मुस्कान रखी और अकेले में आंसू बहाया।
खिड़कियाँ कमरों की थोड़ी खोलते क्यों नहीं,
बहते मंद समीर से थोड़ा मिलते क्यों नहीं l
नई सुबह में नई बात सोचों,
नए विचारों के साथ खुद से मिलते क्यों नहीं l
शुभ प्रभात
"उसकी अहसासों की शौल ओढ़ जब लेता हूँ,उसी साँसो की गर्माहट में जुदाई काट लेता हूँ,यादों ने उनके,साथ मुझसे जोड़ा है कुछ ऐसा,मुस्कुराते हुए, तन्हाई काट लेता हूँ l"
क्या ऐसा नहीं हो सकता?
हम प्यार मांगे और तुम,
गले लगा कर कहो,
और कुछ?
ज़िन्दगी की हर शाम तेरे लिए
ये महफ़िल ये शहर ये नाम तेरे लिए
तू मुस्कुराती रहे हमेशा तारो की तरह
हर सुबह बस यही मेरा पैगाम तेरे लिए
Good Morning Dear