कुछ अल्फाज के सिलसिले से बनती है शायरीऔर कुछ चेहरे अपने आप में पूरी गजल होते हैं
कुछ अल्फाज के सिलसिले से बनती है शायरी
और कुछ चेहरे अपने आप में पूरी गजल होते हैं
कुछ तुम को भी है अज़ीज़ अपने सभी उसूल,कुछ हम भी इत्तफाक से ज़िद के मरीज़ है
"अपने गलतियों पे झुक के माफ़ी माँग लेना,
अपने अहम से जादा रिश्तों को मोल देना,
वैसे तो हमें बार -बार लौट आने की आदत है,
पर मेरी मोह्हबत को कमजोरी ना जान लेना l"
इकरार करने में शब्दों का होना लाज्मी नहीं
दिल के जज्बात ही काफी हैं
आंखें बयान कर देती हैं दिल की दास्तान,
मोहब्बत लफ्जों की मोहताज़ नही होती
दूर हो जाने की तलब है तो शौक से जा…
बस याद रहे की मुड़ कर देखने की आदत इधर भी नही…
जिनकी याद तुम्हें खुशी के लम्हों में आई
समझो कि तुम उन्हें प्यार करते हो
और जो गम में याद आए
जान लो वो तुम्हें प्यार करते हैं