खाली वक़्त में कभी याद आऊंसमझ लेना तुम्हारे अंदर कहीं जिन्दा हूँ मै।
खाली वक़्त में कभी याद आऊं
समझ लेना तुम्हारे अंदर कहीं जिन्दा हूँ मै।
चलो ख़ामोशियों की गिरफ़्त में चलते है…बातें ज़्यादा हुई तो जज़्बात खुल जायेंगे
चलो ख़ामोशियों की गिरफ़्त में चलते है…
बातें ज़्यादा हुई तो जज़्बात खुल जायेंगे
किसी को इतना मत चाहो कि भुला न सको,यहाँ मिजाज बदलते हैं मौसम की तरह।
किसी बहाने पास मेरे रुक जाना,ख्वाब में भी मुझ से दूर ना जाना,बात तेरे जाने की रुला गई मुझे,मरने से पहले मुझको मार ना जाना l
वो अपनी ज़िंदगी में हुआ मशरूफ इतना;
वो किस-किस को भूल गया उसे यह भी याद नहीं।
Itne Lamhe Guzare Hai Tere Saath Humne
Ke Aaj Ek Lamha Tanha Guzarna Mushkil Hain.