बुराई को देखना और सुनना ही
बुराई की शुरुआत है
"कई पुरानी यादें, खोल आया हूँ,सालो बाद, फिर तेरे शहर में आया हूँ,वो चौराहे, वो सड़क, सब वैसा ही है,बस एक तू नहीं, जिससे मिलने आया हूँ l"
हर रंजो - ग़म को, मुस्कुराहट की हवा देता हूँ,'माँ ' जब भी,खुद को तेरे आँचल में छुपा लेता हूँ l
"मिल जायेगी बरसो पहले हो चुकी बेवफ़ा,पर आज शहर में साँसो को हवा ना मिलेगी l"