बुराई को देखना और सुनना ही
बुराई की शुरुआत है
Tum Mujhe Kabhi Dil Se Kabhi Aankhon Se Pukaaro,
Yeh Hontho Ke Takalluf Toh Zamaane Ke Liye Hain.
Tu saath hokar bhi saath nahi hoti
Ab toh rahat mein bhi rahat nahi hoti…
शायर तो हम
“दिल” से है….
कमबख्त “दिमाग” ने
व्यापारी बना दिया.
बहुत दूर है तुम्हारे घर से हमारे घर का किनारा,पर हम हवा के हर झोंके से पूछ लेते हैं क्या हाल है तुम्हारा।