हँसना हसाना काम हे मेरा इसलिए
तो 'kajal' नाम हे मेरा..
"कतरा-कतरा रौशनी का,होके हम जल जायेंगे..हो अंधेरा कितना घना भी,भोर बनके आयेंगे.... "
खो गयी है मंजिले, मिट गए है सारे रस्ते,
सिर्फ गर्दिशे ही गर्दिशे, अब है मेरे वास्ते.
काश उसे चाहने का अरमान न होता,
मैं होश में रहते हुए अनजान न होता
न प्यार होता किसी पत्थर दिल से हमको,
या फिर कोई पत्थर दिल इंसान न होता.
ज़ुल्म इतना ना कर के लोग कहे तुझे दुश्मन मेरा…!!
हमने ज़माने को तुझे अपनी “ जान ” बता रक्खा है…!!
Acha hua maloom ho gaya,
Apno ki mohabbat ab mohabbat nahi rahi,
Warna hum toh apna ghar bhi chhod rahe they,
Unke dil main rehne ke liye