आईना देख कर तसल्ली हुईहम को इस घर में जानता है कोई
आईना देख कर तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
इरादा तो हरगिज न था तुमसे मोहब्बत का,
सच कहे तो तुम्हे देखते ही मोहब्बत हो गयी।
कागज़ पे लिखी गज़ल, बकरी चबा गयी !
चर्चा पुरे शहर में हुई, की बकरी शेर खा गयी.
Mat raho dur hum se Itna ki apne faisle par afsos ho jaye..
Kal ko kya pata aise ho mulaqat humari..
Ki Aap roye lipat kar humse, Aur hum khamosh ho jaye..
निगाहें नाज करती है फलक के आशियाने से,खुदा भी रूठ जाता है किसी का दिल दुखाने से।