छोड़ कर तुम्हारे सपनेकुछ और ना देखना चाहूंगा.ताउम्र तुमसे ही मोहब्बतमैं बेपनाह करना चाहूंगा..
छोड़ कर तुम्हारे सपने
कुछ और ना देखना चाहूंगा.
ताउम्र तुमसे ही मोहब्बत
मैं बेपनाह करना चाहूंगा..
रिमझिम तो है मगर सावन गायब है,बच्चे तो हैं मगर बचपन गायब है..!!क्या हो गयी है तासीर ज़माने की यारोंअपने तो हैं मगर अपनापन गायब है !
Main uske haathon ka khilona hi sahi;
kuch der ke liye hi sahi, usne mujhe chaha to hai..
Ek raat dhadkan ne aankh se pucha.
tu dosti me itni kyu khoi hai?
Tab dil se awaj aayi doston ne hi
saari khusiyan di hai,
warna pyar karke toh ankh royi hai..
ज़ुल्म इतना ना कर के लोग कहे तुझे दुश्मन मेरा…!!
हमने ज़माने को तुझे अपनी “ जान ” बता रक्खा है…!!