हर किसी को मंजिल मिलती नहीं प्यार में।कांटे मिलते है अक्सर फूलों के हार में।।
तुम्हारी आवाज सुनने को, हर पल बेकरार रहता हूँ
नहीं करूंगा याद तुम्हें
मै खुद से हर बार कहता हूँ
मैंने कई बार की प्रार्थनापर ईश्वर सेमाँगा नहीं कभी कुछमुझे लगता हैवो जानता है...हमारे लिए क्या सही हैऔर क्या ग़लत..
बहुत कुछ कहना था,पर कैसे और क्या,ये समझ नहीं आया,तो हाँथ पकड़,उसने कहा 'बस',मैने भी साँसे रोक,ज़रा जोर से दबा दिया l
सुबह की ठंडी हवा,एक प्याली गर्म चाय,तुमसे थोड़ी बात,इतनी खुमारी बहुत हैlदिन भर के ताजगी के लिए l
उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा ???
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है !!!