किसी को डर है इंसान का,
तो किसी को हैवान का .
कोई इससे नहीं बचता ,
डर थोडा-थोडा सबको लगता.
अंधेरों का डर यहाँ किस को है….
डर तो उसका है जो उजालो में ना हो सका!
कभी शब्दो में न
तलाश करना वजूद
मेरा...
मैं उतना कह नहीं
पाती,जितना
महसूस करती हूँ..
वफ़ा की ज़ंज़ीर से डर लगता है,कुछ अपनी तक़दीर से डर लगता है.जो मुझे तुझसे जुदा करती है,हाथ की उस लकीर से डर लगता है!