किसी को डर है इंसान का,
तो किसी को हैवान का .
कोई इससे नहीं बचता ,
डर थोडा-थोडा सबको लगता.
एक फूल अजीब था,
कभी हमारे भी बहुत करीब था,
जब हम चाहने लगे उसे,
तो पता चला वो किसी दूसरे का नसीब था ।
नहीं चाहिए वो सब जो मेरी किस्मत में नहीं,
भीख मांग कर जीना मेरी फितरत में नहीं ।
शायरी सर्दी की ठिठुरती रात में फुटपाथ पर अरमान है
दिलबर मुझे छोड़के किसी और पे मेहरबान है.....
बातो बातो मैं दिल ले जाते हो,देखते हो इस तरह जान ले जाते हो,अदाओ से अपनी इस दिल को धरकाते हो,लेकर बाहों मै – सारा जहाँ भुलाते हो.