लफ्ज़ो को तो दुनिया समझती हैकाश कोई ख़ामोशी भी समझता।
पूरी रात जाग वो मेरा बाहर इंतजार कर रही थी ,पगली ! मैं तेरे भीतर बैठा तेरा राह ताक रहा था l
हँसना-हँसाना चलता रहेगा ,रूठना -मनाना चलता रहेगा lबस आप रहना साथ ,ये खूबसुरत अफसाना चलता रहेगा l
पहली मोहब्बत थी और हम दोनों ही बेबस,वो ज़ुल्फ़ें सँभालते रहे और मैं खुद को।
जी है बड़ी बादशाहत से जिंदगी,उम्मीद है आगे भी रहेगी कायम lकुछ पल का जलजला है,आगे तो फिर है सुकून बिन कोई गम l
होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है