“इच्छा” से कुछ नहीं बदलता “निर्णय” से…
थोड़ा कुछ “बदलता” है लेकिन…
आपका “दृढ़ निश्चय” सब कुछ “बदल” सकता है…
Good Night
हमने ज़िन्दगी बितायीआँख सिरहाने लेकर,रात दुल्हन सी आयीसपने सुहाने लेकर…Shubh Ratri
कल छोड़ आऊं पीछे,आज नए सवेरे की बात होगी lपूरा दिन तो मेरा है,क्या हुआ जो फिर रात होगी l
दिल भी पागल है कि उस शख़्स से वाबस्तासेहैजो किसी और का होने दे न अपना रक्खे
तुम चुपके से निकलते हो,मैं मुस्कुरा देखता हूँ..तुमसे मिला कर नज़र,खुद को फ़ना करता हूँ..
वह अपने करम उँगलियों पर गिनते हैं,
पर ज़ुल्म का क्या जिनके कुछ हिसाब नहीं
हम दूर तक यूँ ही नहीं पहुंचे ग़ालिब ,
कुछ लोग कन्धा देने आ गए थे...