तड़प रहे है हम तुमसे एक अल्फाज के लिए,तोड़ दो खामोशी हमें जिन्दा रखने के लिए।
तेरे पास में बैठना भी इबादत
तुझे दूर से देखना भी इबादत …….
न माला, न मंतर, न पूजा, न सजदा
तुझे हर घड़ी सोचना भी इबादत….
Wo awaaz jo waqt ke dhalne se, Dhaltee nahin,
Wo chain-o-sukun, Jo kisi ibadat mein milti nahin,
Suron mein jashn aisi,Jo jalwon mein dikhti nahin,
Na sune inke naghme, Subah-shaam dhalti nahin,
Rooh ki pyaas itnee, Jo is dard-e-dil se mitti nahin..
हर रात को तुम इतना
याद आते हो के हम भूल गए हैं,
के ये रातें ख्वाबों के लिए होती हैं,
या तुम्हारी यादों के लिए
खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं,जिसे भी देखिए यहाँ हैरान बहुत है।
करीब से देखा तो है रेत का घर,दूर से मगर उनकी शान बहुत है।
कहते है सच का कोई सानी नही,आज तो झूठ की आन बान बहुत है।
मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी,यूँ तो कहने को इंसान बहुत हैं।
वक्त पे न पहचाने ये अलग बात,वैसे तो शहर में अपनी पहचान बहुत है।