काश कहीं से मिल जाते वो अल्फाज हमें भी जो तुझे…
बता सकते कि हम शायर कम तेरे दीवाने ज्यादा हैं…
कोई आदत, कोई बात, या सिर्फ मेरी खामोशी,कभी तो, कुछ तो, उसे भी याद आता होगा।
किसी ने खत में लिखा है "ताबिश"यहाँ कुछ दिन से बारिश हो रही है ।
सूरज निकलने का वक्त हो गया है,फूल खिलने का वक्त हो गया है,लेकिन नींद से जागो मेरे दोस्त,क्योंकि सपनों को हकीकत में बदलने का वक्त हो गया है!Good Morning
गुस्सा ना जाने,सारा कहाँ खो गया lउसकी आवाज़ सुनी,मन फिर उसका हो गया l
"शिकायत करूं, तो नाराज़ हो जाती है,उम्मदगी में अपनी, मैं हार जाता हूँ,मोह्हबत है, और फ़िक्र भी ना आए,ऐसी जिल्लत वाली इश्क़ में मर जाता हूँ l"