काश कहीं से मिल जाते वो अल्फाज हमें भी जो तुझे…
बता सकते कि हम शायर कम तेरे दीवाने ज्यादा हैं…
कोई आदत, कोई बात, या सिर्फ मेरी खामोशी,कभी तो, कुछ तो, उसे भी याद आता होगा।
किसी ने खत में लिखा है "ताबिश"यहाँ कुछ दिन से बारिश हो रही है ।
सूरज निकलने का वक्त हो गया है,फूल खिलने का वक्त हो गया है,लेकिन नींद से जागो मेरे दोस्त,क्योंकि सपनों को हकीकत में बदलने का वक्त हो गया है!Good Morning
मेरे रोने का जिस में क़िस्सा हैउम्र का बेहतरीन हिस्सा है
लोग पूछते हैं की तुम क्यूँ अपनी मोहब्बत का इज़हार नहीं करते,
हमने कहा जो लब्जों में बयां हो जाये
सिर्फ उतना हम किसी से प्यार नहीं करते…!!!